संवाददाता सबलू खा
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पीलीभीत। जनपद की राजनीति के गलियारों में पिछले काफी समय से जिस बदलाव की सुगबुगाहट चल रही थी, उस पर आखिरकार हाईकमान ने मुहर लगा दी है। भाजपा ने संगठन में बड़ी सर्जरी करते हुए संजीव प्रताप सिंह को विदाई दे दी है और जिले की कमान अनुभवी चेहरे गोकुल प्रसाद मौर्य को सौंप दी है। लगभग 6 वर्षों तक जिले के अध्यक्ष पद पर काबिज रहे संजीव प्रताप सिंह के हटने की चर्चाएं लंबे समय से गर्म थीं। राजनीतिक पंडितों के बीच कई नामों को लेकर कयासबाजी हो रही थी, लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने गोकुल प्रसाद मौर्य पर भरोसा जताकर विरोधियों और दावेदारों, दोनों को चौंका दिया है। गोकुल प्रसाद मौर्य कोई नया नाम नहीं हैं। वे लंबे समय से नगर पालिका परिषद पीलीभीत के सदस्य के रूप में जमीनी राजनीति कर रहे हैं। अपनी सौम्य छवि और सभी वर्गों में गहरी पैठ रखने वाले मौर्य के सामने अब संगठन को और अधिक धार देने की चुनौती होगी। जानकारों का मानना है कि उनकी नियुक्ति के पीछे जातीय समीकरणों को साधने और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूंकने की रणनीति छिपी है। नवनियुक्त जिलाध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती मिशन 2027 है। क्या गोकुल प्रसाद मौर्य गुटबाजी को खत्म कर भाजपा के विजय रथ को आगे बढ़ा पाएंगे? यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल नियुक्ति की खबर आते ही गोकुल समर्थकों में जबरदस्त उत्साह है। मिठाई खिलाकर और नारेबाजी कर जीत का जश्न मनाया जा रहा है, मानो जिले की राजनीति में एक नए अध्याय का शंखनाद हो गया हो।